सिविल लाइंस प्लॉट विवाद में सियासी घमासान, पूर्व मुख्यमंत्री का DCP को पत्र; भाजपा नेताओं की चुप्पी पर उठे सवाल ।

सिविल लाइंस प्लॉट विवाद में सियासी घमासान, पूर्व मुख्यमंत्री का DCP को पत्र; भाजपा नेताओं की चुप्पी पर उठे सवाल ।

15-03-2026 12:26 PM | Update Bharat
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जयपुर। जयपुर के सिविल लाइंस क्षेत्र में पिछले 13 दिनों से चल रहा प्लॉट विवाद अब लगातार राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। इस मामले में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इलाके के डीसीपी को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि भाजपा की निवर्तमान पार्षद रेखा राठौड़ नगर निगम की अनुमति का हवाला देकर एक प्लॉट पर कब्जा करने का प्रयास कर रही हैं और वहां रह रही बुजुर्ग महिला अयोध्या देवी को हटाने की कोशिश की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन से कहा है कि यदि किसी भी तरह का दबाव बनाकर कार्रवाई की जा रही है तो उसे तुरंत रोका जाए और पूरे मामले की जांच की जाए।
स्थानीय लोगों का दावा है कि जिस जमीन को रेखा राठौड़ सरकारी या सुविधा क्षेत्र बता रही हैं, वह जयपुर विकास प्राधिकरण के उपलब्ध नक्शों में स्पष्ट रूप से चिन्हित नहीं दिखाई देती। कुछ निवासियों ने ऐसे दस्तावेज भी सामने रखे हैं, जिनसे जमीन की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब इस विवाद ने नया सियासी मोड़ ले लिया है। इलाके में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर रेखा राठौड़ किसके कहने पर यह कदम उठा रही हैं। क्या इसके पीछे भाजपा का कोई बड़ा नेता है या फिर कोई और कारण। लोगों का कहना है कि यदि पार्टी के बड़े नेताओं को पूरे मामले की जानकारी है और फिर भी वे मौन हैं, तो यह चुप्पी खुद कई सवाल खड़े करती है।
इस बीच स्थानीय विधायक की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि जब पार्टी ने उन्हें सिविल लाइंस से टिकट दिया था, तब इसी पार्षद ने उन्हें बाहरी प्रत्याशी बताते हुए खुलकर विरोध किया था। वहीं हाल ही में सामने आए एक वीडियो में रेखा राठौड़ यह कहते हुए दिखाई दे रही हैं कि “विधायक जी आ रहे हैं”, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि इस पूरे विवाद में विधायक की कोई भूमिका है या नहीं। इसका स्पष्ट जवाब तो स्वयं विधायक ही दे सकते हैं।
इधर धोबी समाज के कई नेता और पदाधिकारी भी इस मामले को लेकर भाजपा नेताओं से मिल चुके हैं, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में यह विवाद केवल जमीन का नहीं बल्कि राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा भी बनता जा रहा है।
हालांकि प्रशासनिक स्तर पर कहा जा रहा है कि मामले की जानकारी अधिकारियों तक पहुंच चुकी है और दस्तावेजों की जांच के बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सिविल लाइंस का यह प्लॉट विवाद शहर में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है और सभी की नजर प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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जयपुर। जयपुर के सिविल लाइंस क्षेत्र में पिछले 13 दिनों से चल रहा प्लॉट विवाद अब लगातार राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। इस मामले में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इलाके के डीसीपी को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि भाजपा की निवर्तमान पार्षद रेखा राठौड़ नगर निगम की अनुमति का हवाला देकर एक प्लॉट पर कब्जा करने का प्रयास कर रही हैं और वहां रह रही बुजुर्ग महिला अयोध्या देवी को हटाने की कोशिश की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन से कहा है कि यदि किसी भी तरह का दबाव बनाकर कार्रवाई की जा रही है तो उसे तुरंत रोका जाए और पूरे मामले की जांच की जाए।
स्थानीय लोगों का दावा है कि जिस जमीन को रेखा राठौड़ सरकारी या सुविधा क्षेत्र बता रही हैं, वह जयपुर विकास प्राधिकरण के उपलब्ध नक्शों में स्पष्ट रूप से चिन्हित नहीं दिखाई देती। कुछ निवासियों ने ऐसे दस्तावेज भी सामने रखे हैं, जिनसे जमीन की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब इस विवाद ने नया सियासी मोड़ ले लिया है। इलाके में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर रेखा राठौड़ किसके कहने पर यह कदम उठा रही हैं। क्या इसके पीछे भाजपा का कोई बड़ा नेता है या फिर कोई और कारण। लोगों का कहना है कि यदि पार्टी के बड़े नेताओं को पूरे मामले की जानकारी है और फिर भी वे मौन हैं, तो यह चुप्पी खुद कई सवाल खड़े करती है।
इस बीच स्थानीय विधायक की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि जब पार्टी ने उन्हें सिविल लाइंस से टिकट दिया था, तब इसी पार्षद ने उन्हें बाहरी प्रत्याशी बताते हुए खुलकर विरोध किया था। वहीं हाल ही में सामने आए एक वीडियो में रेखा राठौड़ यह कहते हुए दिखाई दे रही हैं कि “विधायक जी आ रहे हैं”, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि इस पूरे विवाद में विधायक की कोई भूमिका है या नहीं। इसका स्पष्ट जवाब तो स्वयं विधायक ही दे सकते हैं।
इधर धोबी समाज के कई नेता और पदाधिकारी भी इस मामले को लेकर भाजपा नेताओं से मिल चुके हैं, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में यह विवाद केवल जमीन का नहीं बल्कि राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा भी बनता जा रहा है।
हालांकि प्रशासनिक स्तर पर कहा जा रहा है कि मामले की जानकारी अधिकारियों तक पहुंच चुकी है और दस्तावेजों की जांच के बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सिविल लाइंस का यह प्लॉट विवाद शहर में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है और सभी की नजर प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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